👉केजरीवाल जी, छोटे दाव कुश्ती सीखने के लिए ठीक, जीतने के लिए नहीं 👉पंजाब की माली जीतनी है तो बड़ा दाव लगाएं    👉पिछली बार की तरह अपना पहलवान, कहीं खुद ही न हरा दें 👉भगवंत मान बंदा अच्छा, सी.एम कुश्ती के लिए पहलवान कमजोर,
👉केजरीवाल जी, छोटे दाव कुश्ती सीखने के लिए ठीक, जीतने के लिए नहीं
👉पंजाब की माली जीतनी है तो बड़ा दाव लगाएं
👉पिछली बार की तरह अपना पहलवान, कहीं खुद ही न हरा दें
👉भगवंत मान बंदा अच्छा, सी.एम कुश्ती के लिए पहलवान कमजोर,
👉जुगाड़ लगाएं और प्रताप बाजवा जैसा कोई बंदा लाएं

विश्व टी.वी न्यूज- (सैंडीगिल, अभीतेज सिंह गिल): केजरीवाल जी, राजनीतिक कुश्ती सीखने के लिए छोटे-छोटे दाव कारगर साबित हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक माली की कुश्ती के लिए बड़ा दाव ही जीत दिलाता है। इस की उदाहरण आप पिछली बार 2017 में देख चुके हैं कि आपका अच्छा-भला पहलवान सुच्चा सिंह छोटेपुर माली की कुश्ती जीतने के बिल्कुल निकट पहुंच गया था, लेकिन आपके मूर्ख सलाहकारों की उत्तेजना में आने कर, कुश्ती लडऩे से ठीक पहले अपना पहलवान ही अयोग्य करार दे दिया, और एक गलती के साथ आप ऐसे चूके के बहुमत से सीधे 20 सीटों पर आकर मुंह के बल गिरे। इससे आपको तो पता नहीं कितना फर्क पड़ा हो, लेकिन पंजाब की अवाम की आप से लगाईं बड़ी उम्मीदों पर एक बार तो पानी जरूर फिर गया था। 

केजरीवाल जी, अब एक बार फिर 2022 की राजनीतिक कुश्ती के लिए अखाड़ा तैयार है, और आपके लिए शुभ संकेत यह हैं कि पिछली बार माली जीतने वाली कांग्रेस के पहलवान आपस में एक दूसरे को ही ढोने में इतने व्यस्थ हो गए हैं कि उनको ओर कोई विरोधी दिखाई ही नहीं दे रहा। उधर, भाजपा किसानों ने हाशिए पर लाकर रख दी है और अकाली दल की लाख कोशिशों के बावजूद किसानों का साया उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। ऐसे में आपके पास सुनहरी और शायद आखिरी मौका है माली जीतने का, लेकिन इसके लिए आपको बड़ा और तगड़ा पहलवान मैदान में उतारना पड़ेगा। 

जानकार मानते हैं कि आपका पहलवान भगवंत मान बंदा तो अच्छा है, लेकिन माली की कुश्ती के लिए उसमें इतनी जान नहीं कि विरोधियों को चारों खाने चित्त कर सके, क्योंकि पूरे जोर लगाने के बावजूद भगवंत मान और हरपाल सिंह चीमा पंजाब के सियासी अखाड़े के वह पहलवान नहीं बन सके, जो विरोधियों को पहले दाव में ही पटकनी दे सकें।

हां, चण्डीगढ़ में बैठकर बयानों के जरिए समय तो बिता देते हैं, लेकिन माली की कुश्ती के लिए चोटी के पहलवानों में अपना नाम बनाने में पूरी तरह चूक गए, जिस कारणराजनीतिक पंडित मानते हैं कि ऐसे पहलवानों पर माली की कुश्ती के लिए बड़ा दाव लगाना आप के लिए खतरा ही नाम बन जाए। हां, राजनैतिक पंडित यह जरूर कह रहे हैं कि यदि केजरीवाल, कांग्रेस के बेदाग, किदावर और धड़ल्लेदार नेता प्रताप सिंह बाजवा जैसे किसी बंदे को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर चुनावी उखाड़े में उतारते हैं तो आम आदमी पार्टी की तरफ से माली की कुश्ती जीतने के आसार बहुत ज्यादा हो जाएंगे। जानकार यह भी कहते हैं कि केजरीवाल जी, इस बार आप अपने पर लगता वह दाग भी धो दें, जिसमें यह कहा जाता है कि तुसीं वन-मैन आर्मी या वन -मैन शो के  चक्रव्यू में बुरी तरह से जकड़े हुए हो।  इसलिए आप किसी ओर को पार्टी में सिर नहीं उठाने देते। बाकी आप समझदार हो, लेकिन पंजाब के भविष्य के लिए कोई भी बड़ा फैसला लेते समय इतना ख्याल जरूर रखें कि आम आदमी पार्टी के साथ यहां के लाखों लोगों की भावनाएं और बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं और उनको एक बार फिर ठेस न पहुँचे।