👉 सेखड़ी जी, बटाला में फिर आ गए आपके तालिबान? 👉 अब क्या करोगे? कहाँ जाओगे? 👉 चर्चा: सेखड़ी दिल्ली चेयरमैनी बचाने के लिए पहुंचे? 👉 क्या तृप्त धड़ा, प्रताप के बाद सेखड़ी से लेगा बदला?
👉 सेखड़ी जी, बटाला में फिर आ गए आपके तालिबान?
👉 अब क्या करोगे? कहाँ जाओगे?
👉 चर्चा: सेखड़ी दिल्ली चेयरमैनी बचाने के लिए पहुंचे?
👉 क्या तृप्त धड़ा, प्रताप के बाद सेखड़ी से लेगा बदला?

बटाला/चण्डीगढ़/दिल्ली, 29 सितम्बर विश्व टी.वी न्यूज- (ब्यूरो चीफ़): श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी, यह है भी तो बिल्कुल नाजायज, अगर एक आपका बंदा अश्विनी सेखड़ी जो थोड़ी-सी वोटों के साथ हारा और साढ़े 4 साल उसको आपकी ही पार्टी ने राजनैतिक तौर पर ठोकते हुए खूब सजा दी। लेकिन अब जब जोड़-तोड़ करके बेचारे सेखड़ी साब हैल्थ कार्पाेशन के चेयरमैन बने हैं तो बटाले में उनकी छिन चुकी राजनीतिक इज्जत बहाल होने ही लगी थी कि पहले प्रताप सिंह बाजवा का चौपर आ गया और अभी सेखड़ी साब, चोपर के साथ अपने ड्रोन के जरिए निपटने हेतु पूरी रणनीति तैयार ही कर रहे थे, कि कैप्टन ने कालीन बोल्ड होकर चौपर और ड्रोन दोनों ही खतरे में डाल दिए। 

अब जबरदस्त चर्चा है कि सेखड़ी साब ने पानी पी-पी कर तृप्त धड़े को न केवल कोसा, बल्कि गुस्से में उनको कई बार तालिबान का रुतबा भी दिया। अब जब तृप्त धड़़ा फिर पूरे फार्म में आ गया है तो उन्होंने आते ही पहला वार प्रताप धड़े पर किया और चर्चा मुताबिक दूसरा बार सेखड़ी धड़े पर हो सकता है। चर्चा तो यह भी है कि सेखड़ी साब, जिन्हें तालिबान कहते थे, वह फिर बटाले आ गए हैं, जिसके चलते सेखड़ी धड़ा एक बार फिर चक्करों में पड़ गया है। चर्चा अनुसार सेखड़ी साब दिल्ली जा पहुंचे हैं और वह अपनी चेयरमैनी बचाने के साथ-साथ बटाला की टिकट के लिए भी गोटियां फिट करेंगे क्योंकि समय कम है और सेखड़ी धड़ा नहीं चाहेगा कि तृप्त धड़ा एक बार फिर उनको उस समय जमीन पर उतार दे, जब मतदान सिर पर हैं।

उधर सूत्र बताते हैं कि टैंशन में चल रहा सेखड़ी धड़ा दो तरह का मत रखता है। चर्चा अनुसार एक हिस्सा चाहता है कि अगर तृप्त धड़ा दूसरी बार फिर भाजी चढ़ाए तां उसदी भाजी दौगुनी करके मोड़ी जाए और अगर हाईकमान कोई स्टैंड नहीं लेती तो तो दूसरे विकल्पों पर विचार करना राजनैतिक तौर पर वाजिब है। जबकि दूसरे हिस्से का मत है वक्त और हालात क्योंकि वक्त तृप्त धड़े के साथ हैं, इसलिए हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जाए। जबकि उधर जानकार मानते हैं कि अगर तृप्त बाजवा ने बटाला से टिकट न लेनी हो, तो फिर शायद वह सेखड़ी धड़े को बख्श दें और बदला न लेे, लेकिन अगर टिकटें बांटने तक माझा एक्सप्रैस की झंडी रही तो वह और उनके समर्थक यहां से लडऩे का मन बना लेते हैं, तो फिर सेखड़ी धड़े के साथ पंगा पड़ेगा ही पड़ेगा। परन्तु कुछ जानकार यह भी मानते हैं, अगर प्रताप धड़ा बटाले की टिकट के लिए आखिरी दम तक लड़ता है तो तृप्त धड़़ा, प्रताप को रोकने के लिए किसी हद तक भी सकता है तथा अगर बटाला टिकट के लिए उनकी दाल ना गली तो वह प्रताप की दाल में भी कोडक़ू डालकर कभी भी गलने नहीं देंगे। हां, इतनी चर्चा जरूर है कि अगर ऐसे हालात बने तो तृप्त धड़े की कथित मदद से दाल सेखड़ी धड़े की दाल गल जाए। बाकी, दाल चुल्ले पर तीनों ने रख दी है। देखना होगा कि ईश्वर और हाईकमान किसकी गालदा है।